बिकाऊ मीडिया का सच। वेश्यावृत्ति या पत्रकारिता - बिकाऊ मीडिया और टी.वी. चैनलोँ का आतंकवाद।

Wednesday, November 8, 2017

तरुण तेजपाल पर रेप का आरोप तय: मीडिया की तरह कानून में भी भेदभाव क्यों..??

तरुण तेजपाल पर रेप का आरोप तय: मीडिया की तरह कानून में भी भेदभाव क्यों..??

 — 01.10.2017 21:16 Azaad Bharat

अक्टूबर 1, 2017 

न्यूज मैगज़ीन तहलका के पूर्व संपादक #तरुण तेजपाल के खिलाफ गोवा अदालत ने #रेप के #आरोप #तय कर दिए हैं।

#तरुण तेजपाल पर अपनी एक #महिला सहकर्मी से #बलात्कार का आरोप है।
TARUN TEJPAL VS ASARAM BAPU

नवम्बर 2013 में रेप का आरोप लगने के बाद तरुण तेजपाल को गिरफ़्तार कर लिया गया था। तेजपाल को #छह #महीने में #जमानत #मिल गई थी।

तेजपाल पर आईपीसी की धारा 341 (गलत तरीके से नियंत्रण), धारा 342 (गलत तरीके से बंधक बनाना), धारा 354-ए (किसी महिला के साथ यौन दुर्व्यवहार और शीलभंग की कोशिश), धारा 376 (बलात्कार) लगाई गई है।

आपको बता दें कि 2013 में तरुण तेजपाल पर बलात्कार का आरोप लगा था लेकिन 
2013 में हिन्दू संत आसारामजी बापू पर केवल #छेड़छाड़ी के #आरोप लगे थे ।

एक बात गौर करने वाली है कि तरुण तेजपाल के तो #CCTV में #साफ दिखाई दे रहा है कि #तेजपाल #दुष्कर्म कर रहा है, साक्ष्य में पूर्ण #सबूत है लेकिन दूसरी ओर हिन्दू संत आसारामजी बापू के खिलाफ तो लड़की का #मेडिकल हुआ उसमें #साफ लिखा है कि छेड़छाड़ी की ही नही,लड़की के शरीर पर चोट के या प्रतिकार के कोई #निशान #नहीं पायेगे,
 दूसरी बात की जिस समय लडक़ी ने छेड़छाड़ी का आरोप लगाया है उस समय लड़की से #कॉल #डिटल्स से पता चल रहा है कि उस समय तो वे अपने फ्रेंड से लंबी बात कर रही थी और बापू असारामजी एक दूसरे कार्यक्रम में व्यस्त थे तो इससे पता चलता है कि ये #मामला #बनावटी है ।

दूसरी बात की लड़की रहने वाली शाहजहांपुर (उत्तर प्रदेश ) की है, पढ़ती है छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) में, छेड़छाड़ी की घटना बताती है जोधपुर (राजस्थान) की और वो भी घटना के पांच दिन के बाद ।
 दिल्ली में रात को 2:30 बजे एफआईआर करवाती है । जबकि आप अगर एफआईआर किसी दूसरे इलाके में करवाने जाओ तो एक पुलिस स्टेशन दूसरी पुलिस स्टेशन एफआईआर दर्ज नही करती है, लेकिन ये दूसरे शहर की घटना पुलिस दर्ज करती है तो कहीं न कहीं लगता है कि यह मामला उपजाऊ फर्जी है । 

अब आपका सवाल है कि तो फिर वो किस मामले में जेल में बंद है तो आपको बता दें कि 2012 में जो #पोक्सो एक्ट बनाई गई है जिसमें अगर #18 साल से #कम #उम्र की लड़की ने आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवा दी कि मेरे को यह पुरूष घूरता है या स्पर्श किया है तो उस लड़की के बयान पर आपको जेल होगी और आपको सिद्ध करना होगा कि मैंने घूरा नही है या उससे स्पर्श नही किया है अगर आप यह सिद्ध नही कर पाये तो लड़की के बयान को सच मानकर आपको सजा होगी यही मामला बापू आसारामजी पर है लड़की के बयान को सच मानकर उनके खिलाफ केस चलाया जा रहा है जबकि मेडिकल में उनको क्लीन चिट मिलने के बाद भी केस चलाया जा रहा है ।

आपको बता दें कि लड़की बालिग है कि नाबालिग इसमे भी पूरा संदेह है क्योंकि बचपन में पढ़ाई करते वक्त अलग #जन्म #तारीख है, #एलआईसी पॉलिसी में अलग जन्म तारीख है, और स्कूल के #सर्टिफिकेट में #अलग #तारीख है तो अब लड़की नाबालिग है कि नही वो भी कोर्ट में सिद्ध करना बाकी है ।


भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि मैंने बापू आसारामजी को आरोप लगने से पहले ही बता दिया था कि आपने जो #आदिवासी क्षेत्रों में #धर्मपरिवर्तन पर #रोक लगाई है और लाखों #हिन्दुओं की #घरवापसी करवाई है इससे #वेटिकन सिटी नाराज है और #सोनिया गांधी से मिलकर आपको फंसायेंगे । और वही हुआ ईसाई मिशनरियों के इशारे पर #झूठा केस दर्ज हुआ और #विदेशी फंड से चलने वाली #मीडिया ने उनकी खूब #बदनामी की और जेल भिजवाया ।

गौरतलब है कि बीमारी अवस्था में आरोप सिद्ध हुए बिना 81 वर्षीय हिन्दू संत आसारामजी बापू चार साल से जेल में बंद हैं लेकिन उनको जमानत नही मिल पाई लेकिन तरुण तेजपाल के खिलाफ पूरे सबूत होते हुए भी उसको 6 महीने में ही जमानत मिल गई थी ।

आखिर क्यों मीडिया जैसे केवल हिन्दू संतों को ही बदनाम करती है और तरुण तेजपाल पर आरोप सिद्ध होने पर भी चुप है ?

आखिर क्यों कानून में भी यही है कि हिन्दू संत हो तो जमानत नही जबकि पत्रकार नेता आदि को तुरन्त जमानत ??

अब मुख्य बात तो यही है कि किसी साधु-संत पर छोटा आरोप लगते ही #मीडिया खूब चिल्लाती है व अपनी ही बिरादरी के तरुण #तेजपाल पर #आरोप सिद्ध होने पर मौन होकर #चुपचाप बैठी है ।

हिन्दुस्तानी यही #षड्यंत्र को आप भी समझें औरों को भी समझाएं व हिन्दू #संस्कृति पर हो रहे षड़यंत्र का डटकर मुकाबला करें ।

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भारत का मीडिया बन गया है वेश्या का कोठा : पत्रकार देवेंद्र गांधी

भारत का मीडिया बन गया है वेश्या का कोठा : पत्रकार देवेंद्र गांधी

 — 05.10.2017 21:31 Azaad Bharat

अक्टूबर 5, 2017

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है पत्रकार देवेंद्र गांधी का उसमें उन्होंने मीडिया को पूरा नंगा कर दिया है ।
उन्होंने बताया - मीडिया का फंडिग कहाँ से आता है और कौन उसको हैंडल करता है, मीडिया में जो खबरें दिखाई जाती है वे कितनी सच होती है, उन्होंने मीडिया को वेश्या का कोठा बताया ।
India's media has become prostitutes: journalist Devendra Gandhi

आइये जानते है क्या कहा देवेंद्र गांधी ने... 

उन्होंने कहा कि नमस्कार दोस्तों मैं हूं देवेंद्र गांधी।
 #देवेंद्र गांधी एक नाम है आपके लिए, लेकिन मैं मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। 
मीडिया की क्या हैसियत है आज की तारीख में , मीडिया का क्या रुतबा है आज की तारीख में , मीडिया को लोग किस तरह से किस नजरिए से देखते हैं आज की तारीख 
इस पर बात करूंगा और साथ ही साथ आपको ये भी बताऊंगा कि देश के बड़े-बड़े मीडिया हाउसेस कहां से चल रहे हैं ?
कौन उन्हें चला रहा है और कौन उनका मालिक हैं ?


आप और हम अक्सर ये सोचते होंगे कि मीडिया निष्पक्ष है, मीडिया दबाव में काम नहीं करता लेकिन अगर आप आंकड़े देखेंगे और मीडिया चैनल्स के मालिकों की लिस्ट देखेंगे तो आपको थोड़ा-थोड़ा लगने लगेगा कि मीडिया उतना निष्पक्ष नहीं रहा,मीडिया उतना स्वतंत्र नहीं रहा जितना कि हम सोचते हैं या जितने की हम कामना करते हैं। 

यूं तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज की तारीख में मुझे लगता है कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तो कतई नहीं है। 

लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पूरी तरह से या तो ढेर हो चुका है, जर्जर हो चुका है या तो ढेर होने के कगार पर है । 
अगर आज हमने खुद को नहीं संभाला, हमको मतलब मीडिया ने खुद को नहीं संभाला तो ये पिल्लर एक दिन पूरी तरह से धराशाई हो जाएगा और इसका इल्जाम भी मीडिया के सिर ही आएगा, क्योंकि हम खुद इसके लिए जिम्मेदार हैं और हमें इसकी जिम्मेदारी लेनी भी होगी ।

आज मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि मीडिया के कौन-कौन से हाउसेस प्रमुख हाउस इस देश में चल रहे हैं, 
लेकिन इससे पहले मैं 2 बड़े सवाल उठाता हूं, क्या मीडिया इस समय मंडी बन चुका है ?
क्या #मीडिया #पूंजीवादी व्यवस्था की रखेल हो चुका है ? 
क्या #मीडिया कोठे की #वेश्या बन चुका है?
 ये सवाल बड़े गंभीर हैं क्योंकि मैं खुद मीडिया से जुड़ा हुआ हूँ इसलिए ये सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं, क्योंकि यह सवाल मैं किसी और पर नहीं उठा रहा यह सवाल मैं अपने आप पर ही उठा रहा हूँ एक तरह से। 

मैं उतना बड़ा पत्रकार नहीं हूँ कि टेलीविजन चैनल पर खड़ा होकर के इन सब बातों को बोलूं ।
 कोई बोलेगा भी नहीं क्योंकि जब मैं आपको लिस्ट बताऊंगा कि चैनलों के मालिक कौन है तो आप भी सोच कर हैरान रहेंगे कि बड़े-बड़े पत्रकारों के नाम टेलीविजन चैनल पर देखते हैं और सोचते हैं कि शायद इन चैनलों की टेलीविजन चैनलों के मालिक भी यही होंगे और यह पत्रकार ही खबरें तय करते होंगे, नहीं ऐसा नही है पत्रकार कभी भी कतई खबरें तय नहीं करते। यह पूरा प्रोसेस होता है, प्रबंधन खबरों को तय करता है कौन सी खबर दिखाई जानी है , कौन सी खबर नहीं दिखाई जानी ।

TRP का तो मामला है ही कि #TRP की अंधी दौड़ चल रही है। इसके अलावा भी और भी बहुत सारे दबाव होते हैं कभी सत्ता पक्ष का तो कभी विपक्ष का और इस समय जो मीडिया की भूमिका है वह इस तरह से है जिस तरह से एक पूंजीवादी आदमी की कोई दूसरी रखेल हो। 



मैं आपको बताऊंगा दोस्तों कि मीडिया में आज कौन-कौन से प्रमुख चैनल है व इसके मालिकाना हक किस-किस के पास हैं। 

सबसे पहले मैं आपको बताता हूँ आज तक टेलीविजन चैनल के बारे में, ये #इंडिया न्यूज ग्रुप चैनल है जिसके संचालनकर्ता धर्ता जो है वो #अरुण पूरी जी हैं, अरुण पूरी वैसे पेशे से पत्रकार ही हैं।  

दूसरा बड़ा चैनल है देश में #ABP न्यूज कुछ समय पहले तक ABP News उसका नाम स्टार न्यूज हुआ करता था तब इसमें ज्यादा हिस्सेदारी थी स्टार न्यूज की, इसका नाम जो है स्टार न्यूज होता था। अरसे बाद कुछ समय पहले ही इस चैनल का नाम एबीपी न्यूज हो गया क्योंकि ABP अनंत बाजार पत्रिका ने इसका मेजर शेयर स्टॉक था, इसने अपने पास रख लिया।  इस चैनल को चलाती है #अभिजीत सरकार जो कि पश्चिम बंगाल की पुष्ट भूमि से आते हैं जो टेलीविजन से भी जुड़े रहे है। 

तीसरा बड़ा चैनल है देश का #India TV, India TV की स्थापना 20 मई 2004 को हुई थी और जिसको होस्ट करते हैं आज की तारीख में #रजत शर्मा, #ऋतु धवन को तो आप जानते ही हैं , ये भी पेशे से पत्रकार हैं ।

एक चैनल और है News24,
 News24 के जो मालिक है उनके बारे में दिलचस्प जानकारी देता हूँ, केंद्रीय मंत्री जो है श्री रवि शंकर प्रसाद जी उनकी बहन है #अनुराधा प्रसाद और #राजीव शुक्ला जो #कांग्रेस के नेता हैं ये दोनों मिलकर के इस चैनल को चलाते हैं ।
क्रिकेट एसोसिएशन से भी, बीसीसीआई से भी जुड़े रहे राजीव शुक्ला जी।
 वैसे राजीव शुक्ला जी की पहचान एक पत्रकार के तौर से शुरुआत होती है लेकिन वो कब इतने बड़े ग्रुप के मालिक बन जाते हैं ये अपने आप में एक सवाल है। 

तीसरा बड़ा घराना है जो है ZeeNews,
# ZeeNews के जो मालिक है डॉक्टर सुभाष चंद्रा एस्सेल ग्रुप ही Zee News चैनल को चलाता है Zee News के अलावा और भी Zee हिंदुस्तान व और भी कई सारे चैनल है जो एस्सल ग्रुप की तरफ से चलाए जाते हैं और जिनके मालिक है #डॉक्टर सुभाष चंद्रा।  
डॉक्टर सुभाष चंद्रा इन दिनों राज्यसभा के मेंबर हैं, सभी जानते हैं कि #हरियाणा से #राज्यसभा मेंबर चुने गए थे वो और भाजपा ने उन्हें समर्थन दिया था। 
वैसे वो निर्दलीय तौर पर राज्यसभा के सदस्य चुने गए थे और ये जो Zee ग्रुप है वो उनका उनके मालिकाना हक वाली कंपनी है। 

तीसरी बड़ी कंपनी है #इंडिया न्यूज। इंडिया न्यूज जो है वो है विनोद शर्मा, यानी #मनु शर्मा के जो पिताजी है विनोद शर्मा, हरियाणा के मंत्री भी रहे केंद्र में भी वो मंत्री रहे, कार्तिक शर्मा जो विनोद शर्मा जी का बेटा हे वो इस न्यूज चैनल को चलाता है। 

और एक न्यूज चैनल है हमारे देश में न्यूज 18 इस न्यूज चैनल पर जो दबदबा है जो रुतबा है या इस न्यूज का जो मालिकाना हक है वो है रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास। आप चैनल खोलिएगा जब आप टेलीविजन खोलते हैं तो सबसे पहले न्यूज इंडिया TV फिर न्यूज 18 फिर ABP News फिर इस तरह से आप चैनलों की रिमोट पर हाथ रखते रखते चैनल आगे बढ़ते जाते हैं। तो ये जो चैनल है ये कार्तिक शर्मा इसको चला रहे हैं । 

इसके अलावा एक  चैनल और है NDTV इंडिया।  #NDTV इंडिया की स्थापना 1988 में हुई थी जो कि मैंने नेट से चेक किया है और इसको चलाने वाले हैं #प्रणव राय और उसकी पत्नी #राधिका राय और चेयर पर्सन और उनके मालिक का नाम दिया है विधान सिंह जो कि NDTV इंडिया के बारे में बताया जा रहा है। 

आज सवाल यह है कि क्या ये चैनल निष्पक्ष है ??

 बड़ा सवाल आपके सामने ये भी उठता होगा कि जब आप टेलीविजन पर रिमोट पर हाथ दबाते होंगे न्यूज चैनल की तरफ तो जब भी आप टेलीविजन खोलते हैं तो आपके मन में ये बड़ा सवाल उठता होगा, क्या ये चैनल वही दिखा रहा है जो आप देखना चाहते हैं ?
 या चैनल अपना एजेंडा चला रहे हैं, ये सवाल क्यों उठ रहे हैं ? 
ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि जो कुछ आप देखना चाहते हैं वो ये चैनल दिखाना नहीं चाहते। अगर ऐसा होता तो आपके मन में ये शंका ये सवाल कतई नहीं उठते। इसलिए आज सोशल मीडिया पर सबसे बड़ा जो सवाल है वो मीडिया पर ही उठ रहा है ।

मैं रोज देखता हूँ आप भी देखते होंगे कि मीडिया रोज ये दिखाता है कि वायरल सच।  इसका वायरल सच क्या है किसका वायरल सच क्या है। लेकिन मीडिया कभी ये दिखाने की कोशिश नहीं करता कि उनका (मीडिया का) अपना वायरल सच क्या है। 

आज #मीडिया को #चोर , #भ्रष्ट #बेईमान न जाने किन किन तरीकों से नवाजा जा रहा है और जब मैं  इन चीजों को देखता हूँ तो कई बार व्यथित भी हो जाता हूँ, दुखी भी होता हूँ क्योंकि मैं भी मीडिया से जुड़ा हुआ हूं और ये पीड़ा सहनी पड़ती है कि जब लोग कहते हैं कि मीडिया #बिकाऊ है । मीडिया बिक गया है और  ये सवाल मीडिया को सोचना चाहिए।

 क्या उनके सामने यह तस्वीर नहीं जाती की उनके बारे में क्या कहा जा रहा है ? और आज देश में जो हालात है मीडिया को लेकर । ये बातें क्यों होती है ? क्योंकि मीडिया में बहुत सारे पूंजीवादी व्यवस्था के हाथों खेल रहे हैं, वो जो ग्रुप है वो जो प्रबंधन है ,वो तय करता है कि आप कौन सी खबर दिखाएंगे कौन सी खबर नहीं दिखाएंगे। 

ये आज से नहीं है , ये काफी समय से ऐसा होता आ रहा है, चला आ रहा है कि आज कौन सी खबर कौन तय करेगा।

 हम पत्रकार है, मैं बड़ी सच्चाई के साथ बड़ी ईमानदारी के साथ यह कहना चाहता हूँ कि पत्रकार के पास ये अधिकार नहीं है कि क्या खबर चलाई जाए, क्या खबर दिखाई जाए ??

 शुक्र है मार्क जुकरबर्ग का जिसने हमें facebook पर एक मंच दे दिया , इसलिए हम कुछ भी बताते हैं , कोई भी वीडियो अपलोड करते हैं , कुछ भी लाइव चला देते हैं। ये स्वतंत्रता थोड़ी बची है जबकि मीडिया की जो स्वतंत्रता टेलीविजन चैनल हो या अखबार हो उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं और यह सवाल हमने खुद ही अपने ऊपर खड़े किए हैं क्योंकि हम उतने निष्पक्ष नहीं है जितने कि लोग सोचते हैं। 

लोगों को लगता है कि हमारे सामने महंगाई का मुद्दा उठाया जाएगा लेकिन हम नहीं उठाते। हम क्या मुद्दे उठाते हैं, तीन तलाक ट्रिपल तलाक पर रहता है। तीन चार मौलानाओं को बुला लिया जाता है इधर से बीजेपी के एक लीडर को उधर से कांग्रेस के एक लीडर को इधर से सीपीआई के एक लीडर को उधर से आम आदमी पार्टी के लीडर को यानी व्यवस्था को इस तरह से कर दिया जाता है कि तमाम व्यवस्था को सिर्फ यह पांच सात दस लोग ही चलाने वाले हैं। आम लोगों से इस बारे में कोई राय नहीं ली जाती कोई मशवरा नहीं किया जाता इसलिए भी मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं। 

आज कल इन दिनों हिंदू मुसलमान का एक बड़ा फसाद दिखाया जा रहा है और रोहिंग्या मुसलमानों को ले करके भी TRP और अभी थोड़े दिन पहले बाबा राम रहीम का जो प्रकरण हुआ गुरमीत राम रहीम का, उसको लेकर के तो मीडिया की भूख मिट ही नहीं रही। TRP की भूख इस तरह से हासिल है कि जो काम हुआ ही नहीं उसको एकदम से फ़्लैश किया। 
 यानी आप देखिए इतनी जल्दी थी मीडिया चैनलों को फैसले को लेकर कि मीडिया चैनलों ने अपने आप ही सजा सुना दी 10 साल की। जज ने सजा सुनाई 10+10 की लेकिन मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज आई,सब चैनलों पर एक ही न्यूज थी कि बाबा को सजा 10 साल की.. 
यानी कोई भी सब्र नहीं करना चाहता की फैक्ट लाया जाए। 

हम भी इसमें शामिल हैं हम भी जब मौके पर जाते हैं देखते हैं कि चेन मिसिंग हो गई ये भी पूछने की कोशिश नहीं करते भई चेन सोने की थी, असली थी, नकली थी, हम ये भी कोशिश नहीं करते कि दो लाशें  पानी में बह रही है, किसकी है औरत की है,हम फटाफट कोशिश करते हैं आपस में कोई जल्दी से जल्दी खबर को ब्रेक करने की, हमारे अंदर इतनी जल्दी होती है या होड़ होती है कि फटाफट खबर को ब्रेक कर दिया जाए उसके फैक्ट्स बाद में आते रहते हैं तो हम बाद में कॉमेंट्स में या उस पोस्ट में एडिट करके लिखते हैं। ये आज की विडंबना है। असलियत यही है,हकीकत यही है कि मीडिया की वो भूमिका सामने नहीं आ रही जिस भूमिका की लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
 मैं उसमें शामिल हूँ और सबसे बड़ा कटाक्ष भी मैं आज खुद पर कर रहा हूँ, मैं किसी दूसरे पर उंगली नहीं उठा रहा, अगर कुछ साथियों को लगे कि ये मीडिया पर उंगली उठा रहा है या ये अपने आप को साफ चरित्र का पत्रकार बताने में लगा हुआ है तो दोस्तों ऐसा कतई नहीं है। 

आप भी अपने अंदर झांकिए, मैंने तो झांका ही है और मुझे ये लगता है कि मीडिया उतना निष्पक्ष उतना साफ इतना बेदाग नहीं है। 

हम कोठे पर एक वेश्या की तरह हैं,  हम पूंजीवादी लोगों की रखेल की तरह हैं और इसलिए आज हम पर सबसे बड़े सवाल उठ रहे हैं क्योंकि हमने खुद को मंडी के रूप में तब्दील कर लिया है। किसी की कीमत इतनी किसी की कीमत इतनी। 

दोस्तों मीडिया को मंडी होने से बचाइए, हमारा साथ दीजिए इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाइए अगर आप इस खबर को दूर-दूर तक पहुंचाने में सफल रहे, कामयाब रहे तो शायद कारगिल पर में जो जा करके जो सियाचिन में जाकर के अपने देश भक्ति की भावना दिखाते हैं टेलीविजन चैनलों पर छाती ठोक करके अपने आप को राष्ट्रभक्त बताते हैं और कोई ईमानदार बताते हैं ।
कोई सरकार की बखिया उधेड़ रहा है तो कोई सरकार को पॉलिश करने में लगा हुआ है। दोनों ही तरह के लोग हमारे सामने हैं । आपको ही तय करना है कि हमें किसे देखना है किसे नहीं देखना। 

मुझे लगता है कहीं मीडिया हाउसेस जो है वो सरकार को चमकाने में लगे हुए हैं और कई मीडिया हाउसेस ऐसे हैं जो बिन देखे ही बिना कोई प्रमाण के सरकार के बखिया उधेड़ने पर लगे हुए हैं। यानी कुछ मीडिया हाउसेस सरकार का समर्थन जुटाने में और कुछ मीडिया हाउसेस यह दिखाने में कि हम सरकार से पावरफुल है। 
दोस्तो ऐसा मत कीजिए आप अपने देश के बारे में सोचिए जो सही है उसे सही दिखाइए जो गलत है उसे गलत दिखाइए क्योंकि अगर मीडिया नहीं बचेगा तो मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ लोकतंत्र में कुछ नहीं बचेगा। 

हम किसी के पांव की जूती ना बने ,हम किसी पूंजीवादी की रखेल ना बने, हम किसी कोठे की वेश्या ना बने और हम पूंजीवादी चौखट पर घुटने ना टेके, माथा ना रगड़े ।
 ये सवाल हमारे सामने है और इसका हल भी हमें ही खोजना है। मेरा आपसे फिर अनुरोध है इस खबर को हो सके तो ज्यादा से ज्यादा शेयर कीजिए ।

 - पत्रकार देवेंद्र गांधी

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ईसाई पादरी नाबालिक छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, पर मीडिया शांत।

ईसाई पादरी नाबालिक छात्रा के यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार, पर मीडिया शांत

 — 11.10.2017 21:19 Azaad Bharat


अक्टूबर 11, 2017
केरल : ईसाई समुदाय का चर्च जैसे पवित्र धर्मस्थल में दुष्कर्म करने वाले पादरी को मीडिया तथा सेक्युलरिस्ट क्या कहेंगे ?
Pastor arrested on charges of sexual harassment of a minor girl, but calm the media

केरल के एक पादरी को चर्च में 10 वर्षीय स्कूली छात्र के कथित यौन उत्पीडन के मामले में सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया । पुलिस ने बताया कि, यह घटना रविवार की है, जब पीड़िता बाइबिल सुनने के लिए चर्च गई थी । आरोपी ईसाई पादरी देवराज (65) को सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया । वह कंदनथिट्टा सीएसआई चर्च में पादरी है ।
पुलिस ने बताया कि, पादरी के विरोध में #पोक्सो और आईपीसी की #धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया गया है । लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि, वह जब अपनी बेटी को वापस घर ले जाने चर्च गए तो उन्होंने यह घटना देखी ।
यदि इसी प्रकार का आरोप किसी हिन्दू साधू या संत पर लगता है, तो तुरंत मीडिया के लिए वह Breaking News बन जाती है, सभी सेक्युलरिस्ट तुरंत हिन्दू संत तथा धर्म पर टीका करना प्रारंभ करते हैं । परंतु जब कोर्इ #पादरी इस प्रकार के आरोप में गिरफ्तार हो जाता है, तो ये मीडिया वाले तथा सेक्युलरिस्ट कहां छुप जाते हैं..??
#हिन्दू संतों पर झूठे #आरोप लगाये जाते हैं और आरोप साबित नहीं हुआ है, फिर भी उन्हें 'रेपिस्ट बाबा' आदि संबोधन का उपयोग करने वाले मीडिया वाले अब इस पादरी को भी 'रेपिस्ट पादरी' क्यों नहीं कहते ? क्या ऐसा करने से उनका 'सेक्युलरिजम' खतरे में आनेवाला है, ऐसा विचार वे करते हैं ?
आज भी मीडिया में देखों तो बाबा राम रहीम की ही खबरें दिखती हैं लेकिन उनके जेल जाने के बाद तो कई मौलवियों और पादरियों ने बलात्कार किया और पकड़े भी गये और सजा भी हुई लेकिन एक भी खबर नही दिखाई गई ।
मीडिया इतनी #निष्पक्ष #होती तो #मौलवी और #ईसाई फादर के लिए भी #खबरें #दिखाती और डिबेट बैठाकर उनके खिलाफ भी बहस करती लेकिन ऐसा नही कर रही है इससे साफ पता चलता है कि मीडिया को बाकि किसी खबर से लेना देना नही है।
#मीडिया का केवल यही #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #भारतीय संस्कृति को #खत्म कर दिया जाये इसलिए #हिन्दुओं के #धर्मगुरुओं को #टारगेट किया जा रहा है जिससे उनके ऊपर जो करोड़ो लोगों की आस्था है वो टूट जाये और पश्चिमी संस्कृति को अपना ले ।
और बड़े मजे की बात है कि उस न्यूज को हिन्दू ही देखते हैं और बाद में उन्हीं का मजाक उड़ाते है कि देखो कैसे भक्तों को मूर्ख बनाकर पैसे लूट रहे हैं और लड़कियों से बलात्कार करते हैं, लेकिन वही भोला भाला हिन्दू दूसरी ओर कभी नही सोचता कि आखिर #हमारे देश की कई बड़ी बड़ी समस्याएं हैं, #मंहगाई, #बेरोजगारी, किसानों की #आत्महत्या, #राम मंदिर, 370, #गौ हत्या आदि आदि पर #मीडिया #नही #दिखाती है और न ही ईसाई पादरी और मौलवियों के खिलाफ दिखाती है । क्यों इतना प्राइम टाइम देकर हिन्दू धर्मगुरुओं पर ही बहस करती है तो आखिर इतने पैसे आते कहाँ से हैं..??
जैसा कि हम बताते ही आये हैं कि #मीडिया का अधिकतर #फंड #वेटिकन सिटी और मुस्लिम देशों से आता है । जिनका #उद्देश्य है कि कैसे भी करके #हिन्दू संस्कृति को #खत्म करें । जिससे वो आसानी से #धर्मान्तरण करा सके ।
दूसरा पहलू ये भी है कि #राजनेता भी #नहीं चाहते हैं कि किसी भी धर्मगुरू के इतने फॉलोवर्स हो जिससे उनको हर चुनाव में उनके सामने नाक रगड़ना पड़े इसलिए वो भी इसमें शामिल है क्योंकि #राजनेता केवल #वोट बैंक को ही देखते हैं उनको #हिन्दू धर्म से कोई लेना देना नही है।
हमने आज तक अपने पाठकों को सच्चाई से अवगत कराने का प्रयास किया है और आगे भी करवाते रहेंगे ।
आज हर #हिन्दुस्तानी का #कर्त्तव्य है कि वो #मीडिया की बातों में #न आकर स्वयं #सच्चाई तक #पहुँचने का #प्रयास करे । हिन्दू साधु-संतों को बदनाम करने का मतलब भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षडयंत्र है ।
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षडयंत्र का पर्दाफाश : ABP न्यूज ने लड़की पर दबाब डाला संतों के खिलाफ बोलने के लिए

षडयंत्र का पर्दाफाश : ABP न्यूज ने लड़की पर दबाब डाला संतों के खिलाफ बोलने के लिए

 — 14.10.2017 09:38 Azaad Bharat

अक्टूबर 14, 2017 

मुम्बई : इलेक्ट्रॉनिक न्यूज चैनल #ABP न्यूज का चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, ABP न्यूज कैसे #षड्यंत्र करता है और कैसे #झूठी #कहानियां #बनाकर #साजिश रचता है वो वहाँ जॉब करने वाली खुशबू नाम की लड़की ने उनका #पर्दाफाश किया ।

कुछ दिन पहले कांदिवली, मुंम्बई के नम्र मुनि महाराज के खिलाफ ABP न्यूज में आकर एक लड़की यौन शोषण का आरोप लगाया, और कहा कि नम्र मुनि के आश्रम में लड़कियों का यौन शोषण होता है और नम्र मुनि के लेपटॉप में कई लड़कियों के अश्लील फोटो भी मिले हैं । आश्रम में फैशन डिजाइन का खेल खेला जाता है, मॉडलिंग द्वारा अश्लीलता बढाई जाती है ।
लडक़ी द्वारा आरोप लगे, टीवी चैनलों में खूब दिखाया गया लेकिन जैसे ही लड़की वहाँ से भागकर नम्र मुनि के आश्रम में आई और जो सच्चाई बताई वो चौकाने वाली है,मीडिया के झूठ का पोल खुल गया ।

30 वर्षीय लड़की खुशबू ने बताया कि मैं ABP न्यूज में जॉब करती थी और नम्र मुनि से जुड़ी थी । ABP न्यूज की बड़ी एडिटर शिला रावल और हार्दिक हुंडिया था, मैं नम्र मुनि से दीक्षा लेना चाहती थी पर नम्र मुनि ने मना कर दिया जिससे मैंने उनका आश्रम छोड़ दिया, वो शिला रावल और हार्दिक हुंडिया को पता चल गया और मुझे बोला गया कि तू नम्र मुनि के खिलाफ ऐसा ऐसा बोल तो हम तुझे बड़ा बना देंगे और तेरा नाम होगा, वहाँ जॉब कर रही खुशबू ने दबाव में आकर बोल दिया कि मेरे साथ कई बार नम्र मुनि ने यौन शोषण किया और कई लड़कियों का हुआ है । 



आरोप लगाने वाली खुशबू लड़की ने बताया कि मेरे को शिला रावल और हार्दिक हुंडिया ने बताया कि जैसे राम रहीम को एक्सपोज किया है वैसे ही नम्र मुनि का करना है, हार्दिक ने आगे ये भी बताया कि और भी आगे संतो के खिलाफ ऐसा दिखाना है ।

खुशबू ने बताया कि मेरे पर दबाव डाला और मेरे से जबरदस्ती ईमेल करवाये कि लिखो कि मेरे साथ नम्र मुनि ने यौन शोषण किया है और कैमरे के सामने ये सब बोलते समय कैसी एक्टिन करना है वो भी सिखाया गया था । खुशबू को एक स्क्रिप्ट भी दी गई थी जिसमें कैसे नम्र मुनि के खिलाफ केस दर्ज करना है और मीडिया के सामने नम्र मुनि के खिलाफ कैसे बोलना है उसकी जानकारी थी ।


30 वर्षीय खुशबू का स्पष्ट कहना है कि मेरे पर ABP न्यूज एडिटर महिला शिला रावल और हार्दिक हुंडिया ने दबाव डाला था, मैने भी दबाव में आकर ये सब बोल दिया ।
आगे कहा कि और भी संतों को बदनाम करवाने की साजिश रची जा रही है ।

अब आप समझ गये होंगे कि हिन्दू साधु-संतों के खिलाफ कितना बड़ा षडयंत्र चल रहा है, उनको बदनाम करने का, हिन्दू धर्म को खत्म करने की साजिश चल रही है।

आपको बता दें कि हिन्दू संत आशारामजी बापू को भी बदनाम करने के लिए विदेश से भारी फंडिग आती है, विनोद गुप्ता उर्फ भोलानंद ने मीडिया के सामने आकर बताया था। 





भोलानंद ने बताया कि मुम्बई में मेरे योगा सेंटर चलते थे, उसमे इंडिया न्यूज का मुख्य मनीष अवस्थी, इंडिया टीवी का वसीम अख्तर, न्यूज-24 और 'एबीपी न्यूज वाले आकर योगा करने वाली बहनों को बोलते थे कि आप संत आसारामजी बापू के खिलाफ बोलोगेे तो हम आपको करोड़पति बना देंगे, मेरे पास भी संत आशारामजी बापू के खिलाफ स्क्रिप्ट लेकर आये थे उसमे लिखा था कि बापू आसारामजी ने 15-16 लड़कियों का बलात्कार किया, जमीन हड़प ली आदि-आदि लिखा था ।

भोलानंद को बोला गया कि अगर मीडिया में आकर बोलोगे तो हम आपको फ्लेट दिलवा देंगे और 5-6 करोड़ रूपये देंगे । भोलानंद ने बताया कि इंडिया न्यूज का दीपक चौरसिया भी मुझे फोन करके बताता था कि बापू आसारामजी के खिलाफ क्या-क्या बोलना है ।

भारतीय मीडिया में ईसाई मिशनरियों द्वारा वेटिकन सिटी से और मुस्लिम देशों से भारतीय संस्कृति को खत्म करने के लिए और संस्कृति के आधार स्तंभ साधु-संतों को बदनाम करने के लिए भारी फंडिग आती है । क्योंकि साधु-संत धर्मान्तरण में भारी रुकावट डालते हैं ।

सवाल उठता है कि 10-20 हजार की नौकरी करने वाले पत्रकार करोड़पति कैसे बन जाते है? उनकी संपत्ति की जांच होनी चाहिए और संतो के खिलाफ षड्यंत्र रचने वाले मीडिया हाउस के मालिकों एवं पत्रकारों को जेल भेज देना चाहिए ।

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रेप केस: स्वामी नित्यानंद के खिलाफ षडयंत्र करने वाले को पौने तीन करोड़ का जुर्माना

रेप केस: स्वामी नित्यानंद के खिलाफ षडयंत्र करने वाले को पौने तीन करोड़ का जुर्माना

 — 02.11.2017 21:20 Azaad Bharat

नवम्बर 2,   2017        www.azaadbharat.org 

दक्षिण भारत के #स्वामी नित्यानंद के #खिलाफ जब रेप केस लगा था तब #मीडिया ने उनके खिलाफ झूठी खबरें दिखाकर खूब #टीआरपी #कमाई, लेकिन जैसे ही कोर्ट ने #निर्दोष #बरी किया तो #मीडिया को मानो सांप #सूंघ गया ।
 इससे साफ साबित होता है कि #मीडिया #राष्ट्र #विरोधी ताकतों के इशारे पर काम कर रही है, भारत से हिन्दू संस्कृति को खत्म करने के लिए हिन्दुओं के आस्था स्वरूप हिन्दू #साधु-संतों को खूब #बदनाम करो जिससे हिन्दुओ की उनपर से आस्था हटे और #हिन्दुओं को #तोड़ने में आसानी हो ।
स्वामी नित्यानंद के खिलाफ षड्यंत्र करने वाले को न्यायालय ने करोड़ो का जुर्माना लगाया । पर आखिर क्यों मीडिया में कहीं एक भी खबर देखने को नहीं मिली ??
Rape Case: Fifty-three fines fined for conspiracy against Swami Nityananda
क्योंकि ये मामला हिन्दू धर्म के साधु-संतों का है अगर यही मामला ट्रिपल तलाक का होता तो दिन-रात मीडिया खबरें दिखाती ।
हिन्दुस्तानी! सावधान हो जायें, 
#मीडिया आप जो देखना चाहते हैं वो नही दिखाती बल्कि उनको जिस खबर की #फंडिग मिलती है वही खबरें अधिकतर दिखाई जाती है। ऐसी बिकाऊ मीडिया से क्या आप यह उम्मीद रखते हैं कि वह आप तक सच्चाई पहुचायेगी ?
ऐसी बिकाऊ मीडिया का बहिष्कार करना ही देशभक्ति है ।
आपको बता दें कि कर्नाटक की मैसूर #न्यायालय ने #स्वामी नित्यानंद के खिलाफ #झूठी #गवाही देनेवाले #विनय भारद्वाज पर #2.75 करोड़ रुपए का #जुर्माना लगाया है ।
16 अक्टूबर,  2017 को मैसूर में प्रधान वरीय दीवानी (सिविल) न्यायाधीश और मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के माननीय न्यायालय ने स्वामी नित्यानंद के लिए एक बड़ी जीत के रूप में गवाह विनय भारद्वाज, जिन्होंने स्वामी नित्यानंद के खिलाफ अप्राकृतिक यौन संबंधों का आरोप लगाया था, उसके खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला दिया।
माननीय न्यायालय द्वारा विनय भारद्वाज को 2,74,94, 447.5/-, जो कि दो करोड़ चौहत्तर लाख चौरानवे हजार और चार सौ सैंतालिस है। 
राशि का मुक़दमे की तारीख से वसूली तक 9% प्रति वर्ष की दर से जोड़े गए ब्याज के साथ तीन महीनों के भीतर भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
स्वामी नित्यानंद को कथित तौर पर अभिनेत्री रंजीता के साथ दर्शाए गए वीडियो से संबंधित जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग के मामले से जुड़े मुख्य षड्यंत्रकारियों में विनय भारद्वाज एक हैं, इस मामले में चेन्नई के सैयदपेट स्थित ग्यारहवें महानगरीय न्यायालय में भी मुकदमा चल रहा है।
विनय भारद्वाज  2010 में लेनिन करुप्पन द्वारा स्वामी नित्यानंद के खिलाफ दायर उस मामले में भी गवाह हैं जिसे भारत के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा स्थगित कर दिया गया है।
लोगों से ठसाठस भरे हॉल में अपना फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियॉ की।
न्यायालय ने साजिश के आधारभूत कारणों की चर्चा करते हुए "स्वामी नित्यानंद और उनके मिशन के खिलाफ झूठे आरोपों" को बाल-बलात्कारी विनय भारद्वाज के "बचाव के लिए आधार" के रूप में इस्तेमाल किये जाने को रेखांकित किया:
2008 से लेकर  2009 तक, प्रतिवादी (विनय भारद्वाज) ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया और सिएटल मंदिर में कम से कम एक नाबालिग बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार किया।
प्रतिवादी (विनय भारद्वाज) को जब पता चला कि उसे (संबंधित बच्ची को) चुप्पी साधे रखने पर मजबूर करने के उसके (प्रतिवादी के) षडयंत्रात्मक प्रयासों के बावजूद वह नाबालिग बच्ची उसके साथ किये गए व्यवहार को गुप्त नहीं रखेगी, तथा उक्त नाबालिग बच्ची का परिवार उसे (प्रतिवादी को) न्यायालय में घसीटने के लिए तैयार है, तब प्रतिवादी अपने बचाव के लिए आधार बनाने के कार्य में जुट गया और श्री नित्यानंद स्वामी तथा उनके मिशन, जो कि वादी के अलावा अन्य कोई नहीं हैं, उनके खिलाफ झूठे आरोपों का गठन किया।"
अदालत ने आगे जुलाई  2009 के महत्वपूर्ण साक्ष्य के बारे में चर्चा की जिसमें स्वामी नित्यानंद के खिलाफ लगाए गए आरोपों के झूठे होने को साबित किया गया:
"जुलाई  2009 में प्रतिवादी ने अपने एक मित्र और भूतपूर्व भक्तन आरती एस. राव के साथ साँठ-गाँठ करके चालाकी के साथ यह संकेत दिया कि श्री नित्यानंद स्वामी ने अपने कुछ अनुयायियों के साथ दुर्व्यवहार किया था, हालांकि उस समय किसी ने भी इस तरह के आरोप नहीं लगाए थे।
इन सभी दस्तावेजी सबूतों को खारिज करने या अस्वीकार करने के लिए प्रतिवादी द्वारा कोई भी सामग्री पेश नहीं की गई है।"
इस फैसले में उक्त जुलाई  2009 का महत्वपूर्ण साक्ष्य - जिसमें यह साबित हुआ कि स्वामी नित्यानंद की कथित बलात्कार पीड़िता आरती राव का बयान झूठा है – जांच अधिकारियों द्वारा दबा दिए गए प्रमुख दस्तावेजों में से एक है, तथा इसे कर्नाटक के माननीय उच्च न्यायलय ने ट्रायल कोर्ट के सामने पेश करने का आदेश दिया और इस तरह उसने नित्यानंद स्वामी के एक निष्पक्ष बचाव पाने के मौलिक अधिकार की रक्षा की। उक्त सबूत में आरती राव द्वारा कथित तौर पर उसको अंतिम बार बलात्कार किये जाने के छह महीने बाद प्रेषित उसके खुद के ईमेल में यह इकरार किया जाना शामिल है कि उसने स्वामी नित्यानंद के साथ कभी भी यौन संबंध नहीं बनाया।
"अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्य" में कथित बलात्कार पीड़िता आरती राव के  2004-2009 के मेडिकल रिकॉर्ड भी शामिल थे, जिसमें दिखाया गया था कि उनको 4 अत्यधिक संक्रामक और असाध्य एसटीडी (यौन संबंध के माध्यम से फैलने वाली बीमारियाँ) हैं, जिनमें से कुछ केवल स्पर्श द्वारा प्रेषित होते हैं, और इससे आरती राव द्वारा बताए गए संबंधित तारीखों को स्वामी नित्यानंद द्वारा भारत में उसका बलात्कार किये जाने के आरोपों से जुड़े बहुत से झूठों का पता चलता है, उसके मेडिकल रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह एसटीडी के फैलने से राहत पाने के लिए अमेरिका में मिशिगन विश्वविद्यालय के अस्पताल में अपने डॉक्टर के साथ मिली थी।
"सुसंगत और दृढ़ सबूतों" तथा सभी "अकाट्य दस्तावेजी सबूतों" के विश्लेषण के बाद माननीय न्यायालय ने फैसला सुनाया:
यह तय किया जाता है कि प्रतिवादी मुक़दमे की तारीख से वसूली तक मुकदमा दावा राशि पर 9% प्रति वर्ष के दर से जोड़े गए ब्याज के साथ रूपए 2,74,94,447.5/- की राशि को तीन महीने के भीतर वादी के प्रतिष्ठान को पूर्ण रूपेण भुगतान करने के लिए जवाबदेह है।"
यह फैसला भारत के विभिन्न न्यायालयों द्वारा स्वामी नित्यानंद के पक्ष में दिए गए फैसलों की एक श्रृंखला को रेखांकित करता है। कर्नाटक के माननीय उच्च न्यायालय ने पूर्व में कुछ निहित (स्वार्थ से प्रेरित) तत्वों द्वारा  2012 में स्वामी नित्यानंद के खिलाफ दर्ज किये गए मामलों को रद्द कर दिया था। कुछ महीने पहले, कर्नाटक की उच्च न्यायालय ने जांचकर्ता अधिकारियों को जांच के दौरान पाए गए वैसे सभी सबूतों को प्रस्तुत करने का आदेश दिया था जो स्वामी नित्यानंद के पक्ष को मजबूत करते हैं।
लेनिन करुप्पन और आरती राव वर्तमान में चेन्नई के ट्रायल कोर्ट में स्वामी नित्यानंद के खिलाफ ब्लैकमेल, जबरन वसूली, महिलाओं के अश्लील निरूपण और आपराधिक साजिश के लिए मुकदमों का सामना कर रहे हैं।
आप समझ गये होंगे कि कैसे-कैसे षडयंत्र करके झूठे केस में हिन्दू साधु-संतों को फंसाया जाता है और मीडिया भी उसको खूब उछालती है, आज भी हिन्दू विरोधी सोशल साइटों पर स्वामी नित्यानंद जी को बलात्कारी बोलते है क्योंकि उनतक सच पहुँचा ही नही है कि वे कोर्ट में निर्दोष साबित हुये हैं ।
ऐसे ही हिन्दू संत "#आसारामजी बापू" का है उनको भी #बिना #सबूत #4 साल से अधिक समय से #जेल में रखा हुआ है, उनके खिलाफ #अभीतक एक भी #सबूत #नही #मिला है, जबकि उनको #मेडिकल में भी #क्लीनचिट मिल चुकी है और लड़की के #कॉल #रिकॉर्ड से पता चला है कि जिस समय की घटना बता रही है उस समय तो वो अपने मित्र से बात कर रही थी, बापू असारामजी को #फंसाने के कई #सबूत भी #सामने #आ चुके हैं । लेकिन अभी तक उनको #जमानत तक #नही मिल पाई है और उनके खिलाफ भी गलत कमेंट किये जा रहे हैं और मीडिया द्वारा उनके खिलाफ खूब ट्रायल चला ।
इन सब बातों से सिद्ध होता है कि #राष्ट्रविरोधी ताकतें ( विदेशी कंपनी, ईसाई मिशनरी आदि आदि) #राजनेताओं से मिलकर #हिन्दू संतो पर #झूठे आरोप लगाते है और #मीडिया को भारी #फंडिग देकर खूब #बदनाम करवाते है।
अतः हिन्दुस्तानी इन षड्यंत्र को समझेे और षडयंत्र के खिलाफ एक होकर सामना करें ।

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